Maha Kumbh Massacre -मौतें और वह भी भगदड़ की मौतें कैसे छुप जाएगी?

कटाक्ष: मौतें और वह भी भगदड़ की मौतें कैसे छुप जाएगी?
BY-राजेंद्र शर्मा
बेचारे योगी जी की दशा तो, इधर कुआं, उधर खाई वाली हो गयी होगी। इधर भगदड़ और मौतों का षड्यंत्र और उधर, सनातन और कुंभ की बदनामी का षडयंत्र…।
इस बार कुम्भ में पैंतालिस करोड़ लोगों के डुबकी लगाने की उम्मीद जताई जा रही है। मतलब लगभग आधे हिन्दू गंगा स्नान कर अपने पाप धो चुके होंगे। स्वर्ग के हक़दार होंगे। समझा जा सकता है कि आने वाले वर्षों में स्वर्ग के आगे लम्बी लम्बी कातारें लगी होंगीं।
गलत नहीं कहते हैं कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं है। बेशक, मौनी अमावस्या(Mauni ) से बसंत पंचमी तक, कुंभ की भगदड़ के पीछे साजिश की बू आने में चार-पांच दिन की देर हो गयी। पर योगी जी ने अंधेर नहीं होने दिया। अपनी पुलिस को एसटीएफ यानी विशेष जांच दल बनाकर, किसी न किसी तरह का षड्यंत्र सूंघकर निकालने के काम पर लगा दिया।
ऊपर से विशेष आदेश और दे दिया कि अब तक जो देर हुई सो हुई, अब देर नहीं, तड़ातड़ी होगी। दिनों नहीं घंटों में ही षड्यंत्र की स्टोरी सामने होगी। और होनी भी चाहिए। भक्त बेचारे कब तक कभी सोनिया गांधी द्वारा राष्ट्रपति के अपमान, तो कभी आयकर छूट से मिडिल क्लास के टोटल कल्याण की हैडलाइनों से, पब्लिक का ही नहीं अपना भी ध्यान बंटाते रहेंगे!
और षड्यंत्र तो भैया जब भक्तों को पहले दिन बल्कि पहले घंटे से ही दिखाई दे रहा था, तब हैरानी की बात है कि योगी जी को षड्यंत्र की सूंघ लगने में कई दिन लग गए। क्या करें, योगी जी हैं ही इतने भोले। इतनी सी बात तक नहीं समझे कि जब इश्क और मुश्क तक छुपाए नहीं छुपते हैं, तो मौतें और वह भी भगदड़ की मौतें कैसे छुप जाएगी?
अगली सुबह तक इंतजार किया, शायद किसी को पता ही नहीं चले। भीड़-भाड़, चुटियल-घायल में ही मामला निपट जाने की उम्मीद लगाए रहे। पर कुछ फायदा हुआ? षड्यंत्रकारी सोशल मीडिया वालों और दूसरे छुटपुट मीडिया वालों ने, देश तो देश, दुनिया भर में भगदड़ और मौतों की खबर फैला दी। कर दिया सनातन को बदनाम।
काश योगी जी कुंभ और सनातन की बदनामी के वर्ल्ड लेवल के षड्यंत्रों को भांपकर, पहले से ही प्रयागराज में भगदड़ के षडयंत्र का हल्ला मचा देते, तो कम से कम महाकुंभ और सनातन को बदनाम करने के अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र कामयाब नहीं होते। मोदी जी को देश में न सही, विदेश यात्राओं में काफी परेशान करते हैं ये षडयंत्र।
माना कि यह भी सिर्फ कह देने जितना आसान नहीं था। मुश्किल यह थी कि कुंभ में मुसलमानों के प्रवेश पर करीब-करीब घोषित प्रतिबंध था। मुसलमान दुकान वाले, मुसलमान सेवाएं देने वाले, मुसलमान धर्मगुरु, सब को पहले ही बता दिया गया था कि कुंभ में उनका स्वागत नहीं है। नगरपालिका से लेकर योगी जी तक, सब बता चुके थे कि दुनिया का सबसे बड़ा मेला जरूर है, पर कुंभ सिर्फ सनातनियों का, सनातनियों द्वारा और सनातनियों के लिए है। और मुसलमानों के लिए तो हरगिज नहीं है। ऐसे में षड्यंत्र का इल्जाम लगाते भी तो किस पर? दुनिया तो यही मानती कि मेला सनातनियों का, भीड़ सनातनियों की, भीड़ का रेला सनातनियों का, सनातनियों की भीड़ के पांवों तले कुचल के मरने वाले सनातनी, और सरकार भी सनातनी। इसमें कहां का षड्यंत्र, यह तो सनातनियों का शुद्ध रूप से घरेलू मामला है!
बेचारे योगी जी की दशा तो, इधर कुआं, उधर खाई वाली हो गयी होगी। इधर भगदड़ और मौतों का षडयंत्र और उधर, सनातन और कुंभ की बदनामी का षडयंत्र बल्कि सनातन की बदनामी दोनों में। बेचारे शोर मचाते तो किस षडयंत्र का शोर मचाते! सो उन्होंने तो जब्त कर के भगदड़ के षडयंत्र का शोर नहीं मचाया, पर सनातनविरोधियों ने सनातन की बदनामी का डंका बजा दिया। खैर! अब तक जो हुआ सो हुआ, अब योगी जी भी षडयंत्र का डंका बजाएंगे और कम से कम भक्तों को इसकी तसल्ली बंधाएंगे कि सनातनियों की जानें बेकार नहीं जाएंगी। कुचल के मरने वालों ने भी कुर्बानी दी है, सनातनी राष्ट्र की खातिर, जैसे पुलवामा के आतंकी हमले में मरने वालों ने राष्ट्र की खातिर कुर्बानी दी थी।
अब बाल की खाल निकालने वाले देते रहें इसकी दलीलें कि कोई इस टाइप का षड्यंत्र रचकर, उसे अंजाम देने में कामयाब भी हो गया, तो यह तो डबल इंजन वाले राज की ही नाकामी हुई। पर ऐसी बारीक दलीलों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। ऐसी डबल इंजन की नाकामी तो पुलवामा में भी थी और अभी तक है क्योंकि अब तक पता नहीं चला है कि 300 किलो आरडीएक्स कहां से आया? पर नाकामी से क्या हुआ, चुनाव में तो पब्लिक ने मोदी जी को सजा की जगह इनाम ही दिया, पिछली बार से ज्यादा बहुमत के साथ पीएम की गद्दी का। कौन जाने इस षड्यंत्र के शोर का, योगी जी को भी 2027 में ऐसा ही इनाम मिल जाए।
रही बात मौतों-वौतों की तो, अब जब षड्यंत्र का शोर मचाने का मन बना ही लिया है, तो मौतों की संख्या की योगी जी को ज्यादा परवाह करने की जरूरत नहीं है। पहली बात तो यह है कि 30 की जो गिनती एक बार बोल दी, योगी जी उसी पर कायम रहेंगे, तो मजबूत नेता ही माने जाएंगे। मजबूत नेता, गिनती करने में नहीं बताने में विश्वास करते हैं। एक गिनती बता दी तो बता दी, बार-बार क्या बदलना। बाकी सब कुछ मैनेज करने के लिए पुलिस-प्रशासन तो है ही। मरने वालों की गिनती फालतू हो रही हो, तो लिस्ट दो ही मत। मिट्टी भी मत दो। या मरने वालों के घरवालों से चिट्ठी लिखा लो, मरने वाला खुद मरा था, अपनी मर्जी से। या रेत में दबा दो। और यह तो उनके लिए है जो सनातनी होकर भी, ऐसे शुभ मुहूर्त में गंगा के किनारे हुई मौतों को भी सिर्फ मौत ही मानने पर अड़ जाएं। वर्ना बाकी सब के लिए तो बागेश्वर धाम का फलसफा है ही। जाना तो सभी को है, किसी को दस साल बाद, किसी को बीस साल बाद, किसी को तीस साल बाद। पर जो गंगा के तट तक पहुंचकर चला जाए, उसे मृत्यु नहीं, मोक्ष कहते हैं। थैंक यू योगी जी, मोदी जी, कुंभ में मोक्ष का भी इंतजाम करा दिया!
बस एक ही बात मन में खटक रही है। जब कोई मौत ही नहीं हुई, तो एसटीएफ काहे के षड्यंत्र की जांच करेगी? क्या प्रयागराज के षडयंत्रकारियों को भी सनातनियों को मोक्ष दिलाने में मदद करने के लिए, थैंक यू लेटर दिए जाएंगे!
(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोक लहर के संपादक हैं।)