RAAH GROUP-तलवंडी राणा की श्मशान भूमि बनी पर्यटन स्थल

लाखों फूलों की खुशबू से महका तलवंडी राणा का रामबाग
प्रदेश के साथ-साथ देश भर में हो रहा है अनुसरण
पांच वर्ष पहले बोया जागरूकता का पौधा बना, अब बना वट वृक्ष
हिसार/न्यूज हैण्ड ब्यूरो
प्रदेश के प्रथम ऑक्सीजन जोन विलेज तलवंडी राणा की श्मशान भूमि(Talwandi Shamshan Ghat )इन दिनों पर्यटन स्थल बनी हुई है। स्थानीय ग्रामीण जहां पर यहां हर रोज सुबह-शाम मॉर्निग वॉक के लिए आते है, वहीं प्रदेश के सैकड़ों युवा एवं कॉलेज एवं स्कूलों के विद्यार्थी यहां शैक्षणिक भ्रमण के लिए आ रहे हैं। यहां बता दे कि तलवंडी राणा की श्मशानभूमि में इन दिनों अलग-अलग किस्म के फूलों की बहार आई हुई है। यह बहार भी महज मौसमी नहीं बलिक वर्ष में करीब 11 माह यहां दर्जनों किस्मों के फूल खिले हुए हैं। तलवंडी राणा गांव की श्मशान भूमि की सुन्दरता का आलम यह है कि यहां पर न केवल प्राकृतिक फूलों की बहार आई हुई है बल्कि यहां पर जानवरों एवं पक्षियों का सरंक्षण प्रदान करने के लिए प्राकृतिक ताने-बाने को भी नहीं छेड़ा गया है। यहां की खास बात यह है कि तलवंडी राणा की श्मशान भूमि में पौधारोपण करके एवं गंदे पानी के बेहतर उपयोग करने, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, लैड स्केपिंग, मार्डन गार्डनिंग पद्वति का उपयोग करके यहां पौधारोपण की नई इबारत लिखी गई।
युवा क्लबों के सदस्य एवं कॉलेजों के छात्र कर रहे भ्रमण:-
युवाओं को प्रकृति से जोड़ने व ग्राम स्तर पर पौधरोपण को बढ़ावा देने के लिए नेहरू युवा केन्द्र एवं अलग-अलग शिक्षण संस्थान इन दिनों प्रदेश के पहले ऑक्सीजन जॉन विलेज तलवंडी राणा के भ्रमण कर रहें हैं। जिसमें तलवंडी राणा की श्मशान भूमि इन युवाओं एवं पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। जिसमें युवा श्मशान भूमि एवं इसी प्रकार की विरान पड़ी भूमि के सकारात्मक उपयोग, पौधारोपण की अलग-अलग तकनीक, गंदे पानी के बेहतर उपयोग करने, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, लैड स्केपिंग, मटका थरैपी, मार्डन गार्डनिंग एवं प्राकृतिक वातावरण में पक्षियों एवं जानवरों के संरक्षण की तकनीक समझ रहे हैं। इसमें मुख्य रुप से जिले के 309 गांवों में बने 346 युवा मंडलों से जुड़े युवा, अलग-अलग कॉलेजों एवं दूसरे शिक्षण संस्थानों के विद्याथीर् इन दिनों तलवंडी राणा श्मशान भूमि में भ्रमण एवं शिक्षण के लिए आ रहे हैं।
फूलों से महक रहें दस से अधिक श्मशान:-
सामाजिक संस्था राह ग्रुप फाउंडेशन के प्रयासों से प्रदेश के दस से अधिक श्मशान, 300 से अधिक स्कूल व दूसरे सार्वजनिक स्थान महक रहे हैं। राह संस्था के नेशनल चेयरमैन नरेश सेलपाड़ ने अपनी टीम के साथ वर्ष 2019 अपने गांव तलवंडी राणा के श्मशान घाट व दूसरे स्थानों पर फूलों की पौधे लगाकर उनका वितरण आरंभ किया। यहां उनका मकसद ग्रामीणों का रुख फूलों से लेकर पेड़-पौधों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण एवं श्मशान या दूसरे प्रकार की विरान भूमियों का कायाकल्प कराना था।-----------------बेहद खराब रही शुरुआत :-किसी भी अच्छे कार्य की तरह सामाजिक संस्था राह ग्रुप फाउंडेशन की कलरफुल इण्डिया नामक मुहिम की शुरुआत भी अधिक अच्छी नहीं रही। जब यह कार्य आरंभ हुआ तो लोग ताने मारते थे। इस मुहिम से जुड़े युवाओं के घरवाले भी हिदायत देते थे कि यह कार्य छोड़ दो। जैसे-जैसे पौधे बड़े हुए, उन पर फूल लगने लगे तो नफरत करने वालों की भाषा भी प्रेम में बदल गयी। तब से फूल उगाने का अभियान बढ़ता गया। राह ग्रुप फाउंडेशन व ग्रामीणों की टीम के समर्पण और इरादों के आगे सभी मुश्किलें बौनी साबित हुई। अब आलम यह है कि जहां से कभी बदबू के कारण गुजरना मुश्किल होता था, अब वहां फूल महक रहे हैं।
किस-किस किस्म के हैं फुलदार पौधे:-
राह ग्रुप फाउंडेशन के नेशनल चेयरमैन नरेश सेलपाड़ व तलवंडी राणा रामबाग समिति के उपाध्यक्ष सरदूल वर्मा के अनुसार राह फाउंडेशन की कलरफुल इंडिया मुहिम के तहत तिकोमा, पांच प्रकार के सदाबहार, डेलिया, आइस, कराईटेना, करन डोला, प्लक, फ्लोक्स, स्वीट विलियम, कॉसमॉस, कैलेन्डूला, डेजी, स्टॉक, वॉल फ्लावर, पॉपी, कैलिफोर्निया पॉपी, नगरेट, लीफ वॉल फ्लावर, चांदनी, चांदी टफ, डहेलिया, पंजी, वरबीना, डिपोरिया, बराइकम, गजेनिया, जेरेनियम, स्टाक, सालविया, आस्टर, डैफोडिल, फ्रेशिया जैसे पौधे लगाए गए ।
. प्रदेश के साथ-साथ देश भर में हो रहा है अनुसरण :-
तलवंडी राणा गांव की श्मशान भूमि में बदलाव का जो पौधा करीब पांच वर्ष पहले लगाया गया, उस मुहिम देश- प्रदेश में व्यापक अनुसरण हो रहा है। एक ओर जहां ग्रामीण एवं पंचायतें अपने गांव में इसी मॉडल को अपनाने के लिए इसे देखने आते हैं, वहीं सैकड़ों श्मशान भूमियों को यहां से लाखों फूलदार पौधे उपहार स्वरुप भेंजे जाते हैं।
बेहद कठिन रहा सफर
राह ग्रुप फाउंडेशन की कलरफुल इंडिया मुहिम का सफर बेहद चुनौतियों भरा रहा। सवा पांच वर्ष पहले संस्था के नेशनल चेयरमैन नरेश सेलपाड़ ने इस मुहिम के रास्ते में अनेक मुश्किलें आई, जिसमें पौधे लगाने के लिए बजट, पौधों में पानी देने के लिए टैंक व दूसरे साधनों की व्यवस्था करना, बेसहारा पशुओं से होने वाले नुकसान के कारण उनकी मुहिम को कई झटके लगे।
टका थेरेपी बनी वरदान : -
ऑक्सीजन जोन विलेज तलवंडी राणा में पौधारोपण करने में मटका थेरेपी तकनीक बेहद कारगर रही। इस तकनीक से बेहद कम पानी की मात्रा का उपयोग करते हुए पौधों को लंबे समय तक सिंचित किया जा सकता है। इस पद्धति में पौधों रोपने के समय ही उसी गड्ढे के अंदर पुराने मटके को रख दिया जाता है। इस मटके की तली में एक छेद किया जाता है, जिसमें जूट या सूत की रस्सी पौधे की जड़ों तक पहुंचाई जाती है। इसमें यह ध्यान रखा जाता है कि मटके का मुंह खुला रहे। धूप या प्रदूषण से बचाने के लिए इसे कपड़े से ढक दिया जाता है। इससे कम मात्रा में खाद एवं पानी देने के बावजूद भी पौधा दो-गुणा गति से बढ़ौतरी करता है।
तीन चरणों में लगाए दो हजार पेड़:-
प्रदेश के पहले ऑक्सीजन जोन विलेज तलवंडी राणा में विगत पांच वर्षों में गांव की श्मशान भूमि में तीन चरणों में दो हजार से अधिक औषधीय, छायादार, सजावटी व फलदार पौधे लगाए गए हैं। तलवंडी राणा गांव की श्मशान भूमि में बरगद, पीपल, नीम, पील/जाल, कदम, शीशम, आंवला, अमलतास, जॉटी, कनेर, चांदनी, गुगल बेल, अर्जुन, अमरूद, आम, जामुन, एलोवेरा, तुलसी, गिलोय इत्यादि जैसे अधिक ऑक्सीजन देने वाले पौधों के साथ-साथ सुन्दरता बढ़ाने वाले सजावटी पौधे भी लगाए गए हैं।
पुराने वृक्षों का भी संरक्षण:-
गांव तलवंडी राणा के श्मशान घाट में पहले से लगे पौधों को भी नया आकार प्रदान कर सुन्दर बनाया गया है। जिसमें जाल, कीकर, कैर व दूसरे पौधों को विशेष आकार व प्रकार देकर संरक्षित किया गया है।