Faridabad News-फरीदाबाद के इस सरकारी स्कूल से बच्चे व अध्यापक गायब लेकिन हर पांच साल में सिर्फ नेता निकलते है कैसे ?

फरीदाबाद के इस सरकारी स्कूल से बच्चे व अध्यापक गायब लेकिन हर पांच साल में सिर्फ नेता निकलते है कैसे ?

फरीदाबाद(न्यूज हैंड ब्यूरो)

हरियाणा सरकार भले ही कह रही हो कि बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने के लिए नए स्कूल बनाए जा रहे हैं, लेकिन कुछ सरकारी अफसरों की लापरवाही के चलते इस स्कूल पर जनता के टैक्स का लाखों रुपए खर्च कर इसे भूली-बिसरी याद बनाकर हमेशा के लिए भुला दिया है. अब सिर्फ चुनाव के वक्त सरकारी महकमे को याद आता है कि यहां कोई स्कूल भी है जिसकी बिल्डिंग खड़ी है और यहां एक पोलिंग बूथ बनाया जा सकता है. ऐसे में पोलिंग बूथ बनाया जाता है और लोग यहां मतदान करने के लिए आते हैं. लेकिन चुनाव के बाद अगले 5 साल तक शायद सरकारी अफसरों को ये याद नहीं रहता कि यहां कोई स्कूल भी है, तभी तो आज स्कूल की ये बिल्डिंग अपने अस्तित्व पर आंसू बहा रही है और सोच रही है कि ना जाने किस मनहूस घड़ी में उसे बनाया गया, ना जाने कब वो पल आएगा जब यहां स्कूल की घंटी सुनाई पड़ेगी, क्लासरूमों में छोटे-छोटे बच्चे पढ़ते और स्कूल परिसर में दौड़ भाग करते हुए नजर आएंगे. क्या सरकारी अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागेंगे. क्या हरियाणा सरकार इस पर कोई संज्ञान लेगी या फिर ये स्कूल एक खंडहर बनकर ही रह जाएगा. अब अधिकारी इस मामले में एक्शन लेने का दावा तो कर रहे हैं लेकिन देखने वाली बात होगी कि क्या वाकई कुछ एक्शन होता है या नहीं.

जी हाँ आरटीआई कार्यकर्ता सतपाल सिंह व आरटीआई कार्यकर्ता आकाश गुप्ता के अनुसार फरीदाबाद में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो आपके होश उड़ा देगा. दरअसल फरीदाबाद में सरकारी स्कूल पिछले 9 सालों से बनकर तैयार है लेकिन बच्चे और टीचर स्कूल से गायब है. सरकार की नज़र में ये स्कूल जरूर है क्योंकि चुनाव आने पर यहां वोटिंग के लिए पोलिंग बूथ भी बना दिया जाता है, लोग बकायदा वोटिंग के लिए आते हैं, लेकिन 9 सालों से बच्चों और टीचर की स्कूल में एंट्री नहीं हो पाई है.मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आज स्कूल पूरी तरह से असामाजिक तत्वों के कब्जे में है. स्कूल में कपड़े सुखाए जा रहे हैं, स्कूल के अंदर चूल्हा जलाया जाता है, दरवाजे को तोड़कर क्लासरूम में बाइक खड़ी कर दी जाती है. हालात ये है कि देर रात नशेड़ी स्कूल में आकर पार्टी कर चले जाते हैं. लेकिन बच्चे आए या ना आए किसी को क्या फर्क पड़ रहा है.

:मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद के सेहतपुर के सूर्य नगर में पिछले 9 सालों से स्कूल की सरकारी बिल्डिंग बनकर तैयार है. स्कूल के सामने गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल का बोर्ड भी साफ तौर पर चस्पा करके रख दिया गया है. लेकिन स्कूल की बिल्डिंग होने के बावजूद, बोर्ड तक लगे होने के बावजूद बस पढ़ाई नहीं हो पा रही है. , आरटीआई कार्यकर्ता स्कूल के हालातों के बारे में प्रशासन और शिक्षा विभाग को लगातार जानकारी देते रहे हैं, लेकिन अभी भी स्कूल में ना कोई शिक्षक है और ना ही कोई स्टूडेंट.





स्कूल पर अवैध कब्जा : मीडिया से बातचीत में आरटीआई कार्यकर्ता सतपाल सिंह ने बताया कि "ये गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल बनाया गया था. इस स्कूल का निर्माण 2016 में हुआ था जिसमें लागत लगभग 16 लाख रुपए आई थी. स्कूल को बनाने के लिए किसी ठेकेदार के बजाय एक टीचर को जिम्मेदारी दी गई थी. भवन का निर्माण होने के बाद इसे शिक्षा विभाग को हैंडओवर करना था लेकिन शिक्षा विभाग को इसे हैंडओवर नहीं किया गया. इसमें कोई टीचर, कोई बच्चा कभी आया ही नहीं और ये बिल्डिंग लगातार खंडहर होती चली गई. असामाजिक तत्वों का इस पर कब्जा हो गया है.

सीएम विंडो में भी लगाई गई शिकायत :आरटीआई कार्यकर्ता सतपाल सिंह व आरटीआई कार्यकर्ता आकाश गुप्ता ने बताया कि स्कूल की इस बिल्डिंग का निर्माण आज से करीब 10 साल पहले हुआ था, लेकिन अभी तक ये स्कूल चालू नहीं हुआ. ना तो अभी तक कोई शिक्षक आया और ना ही किसी बच्चे का एडमिशन हुआ. जब हमने सीएम विंडो में इसकी शिकायत की, तब कहीं जाकर स्कूल के सामने स्कूल का बोर्ड लगाया गया. लेकिन उसके बावजूद भी आज तक यहां पर कोई एडमिशन नहीं हुआ. आज स्कूल पर आसामाजिक तत्वों का कब्जा है. शाम 7 बजे के बाद कोई बहन-बेटी वहां से गुजर नहीं सकती.

शिकायत के बावजूद कोई एक्शन नहीं : आरटीआई कार्यकर्ता सतपाल सिंह व आरटीआई कार्यकर्ता आकाश गुप्ता ने आगे बताया कि सीएम विंडो से उनके पास ये जवाब भी आया कि स्कूल के पास में कोई गड्ढा था, वहां पानी था. वहां बच्चों के गिरने का ख़तरा है. इस वजह से वहां पर कोई एडमिशन नहीं किया जा रहा है. इस पर उन्होंने कहा कि जब इतने पैसे खर्च करके स्कूल बनाया जा सकता है तो क्या एक दीवार नहीं बनाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि मैंने अपने एनजीओ की ओर से दीवार बनवाने का ऑफर तक दिया था. लेकिन कोई जवाब नहीं आया और ना ही कोई एक्शन लिया गया. उन्होंने कहा कि कैसे पढ़ेगा इंडिया, कैसे पढ़ेगा इंडिया, जब स्कूल पर ताला लगा रहेगा.

पल्ला झाड़ रहा विभाग : आरटीआई कार्यकर्ता सतपाल सिंह व आरटीआई कार्यकर्ता आकाश गुप्ता ने आगे बताया कि सरकारी जमीन पर ये बिल्डिंग है, 16 लाख रुपए भी खर्च किए गए, शिक्षा विभाग अपना पल्ला झाड़ता है, डीपीसी अपना पल्ला झाड़ता है. ये बिल्डिंग ऐसे ही खंडहर हो रही है. इस बारे में स्थानीय विधायक और मंत्री तक को जानकारी दी गई. ये भी कहा गया कि कार्रवाई होगी, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई. मैंने जब आरटीआई लगाई तो शिक्षा विभाग ने कहा कि हमें तो इस बारे में पता ही नहीं है, हमारे पास तो हैंडओवर ही नहीं आया. डीपीसी ने कहा कि हमने शिक्षा विभाग को लिखा था, लेकिन उन्होंने हैंडओवर नहीं लिया.

क्या कहते है जिला शिक्षा अधिकारी ? : हालांकि इस मामले को लेकर मीडिया ने फरीदाबाद के जिला शिक्षा अधिकारी अजीत श्योरान से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि मैं अभी यहां पर नया आया हूं. मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है. आप खंड शिक्षा अधिकारी से बातचीत करके जानकारी ले लीजिए.

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