क्रिसमस त्यौहार ही नहीं पापखंड से दूर इंसान को इंसान को मिलाने वाला दिन

यीशु मसीह — शक्ति के युग में विनम्रता का घोष

क्रिसमस — धर्म से आगे मानवता का उत्सव

हृदय में जलता दीप — यीशु और करुणा का दर्शन

· प्रो. आरके जैन "अरिजीत"

जगमगाती रोशनी, मधुर गीतों और हृदयों में उमड़ते प्रेम के साथ मनाया जाने वाला क्रिसमस केवल एक उत्सव भर नहीं है, बल्कि मानवता के लिए करुणा और आशा का दिव्य संदेश है। यह वह पावन अवसर है जब ईश्वर ने मानव रूप में अवतरित होकर अंधकार से आच्छादित संसार को प्रेम और दया की ज्योति से आलोकित किया। प्रभु यीशु मसीह(Yeshu Prabhu Hai (Jesus is Lord)) का जन्म न केवल ईसाई समाज के लिए, बल्कि समस्त मानव जाति के लिए यह शाश्वत संदेश देता है कि प्रेम सबसे बड़ा धर्म है और सेवा से श्रेष्ठ कोई मार्ग नहीं। यह पर्व हमें यह भी स्मरण कराता है कि सच्ची प्रसन्नता अपने सुख में नहीं, बल्कि दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाने में निहित है। क्रिसमस की उजास भरी यह लौ हर हृदय में क्षमा, दया और समर्पण की भावना जगाने का आह्वान करती है। यह उत्सव हमें प्रेरित करता है कि हम अपने भीतर की स्वार्थ की दीवारें गिराकर मानवता के विशाल आँगन में एक-दूसरे के लिए जीने का संकल्प लें।








लगभग दो हजार वर्ष पहले, जब दुनिया अन्याय, भेदभाव और अज्ञानता के गहन अंधेरे में डूबी थी, बेथलहम की एक साधारण गौशाला में एक असाधारण शिशु का जन्म हुआ। वह शिशु था प्रभु यीशु मसीह—ईश्वर का अवतार, मानवता का मुक्तिदाता। पवित्र मरियम को स्वर्गदूत द्वारा दी गई सूचना साकार हुई और उस विनम्र स्थान ने विश्व को वह प्रकाश दिया जो आज भी मार्ग दिखाता है। यीशु का जन्म सिद्ध करता है कि सच्ची महानता भव्य महलों में नहीं, बल्कि नम्र हृदयों में निवास करती है। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन से प्रमाणित किया कि आध्यात्मिकता का असली रूप बाहरी दिखावे में नहीं, अपितु जरूरतमंदों की सेवा और पीड़ितों के प्रति करुणा में है। उनके उपदेशों ने समाज को यह संदेश दिया कि धर्म का सच्चा अर्थ मानव-कल्याण में है, न कि केवल रीति-रिवाजों में।

क्रिसमस की सबसे बड़ी विशेषता उसकी सर्वव्यापी एकता है जो विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और राष्ट्रों को एक सूत्र में पिरोती है। भारत जैसे बहुलतावादी देश में यह पर्व अपार उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है। रात्रि की मध्य प्रार्थनाएँ, घरों की रंग-बिरंगी सजावट, क्रिसमस ट्री की चमक, उपहारों का आदान-प्रदान और बच्चों की सांता क्लॉज की प्रतीक्षा—ये सभी इस उत्सव को अविस्मरणीय बनाते हैं। भारतीय घरों में लाल पॉइन्सेत्तिया के फूल, तारों से जगमगाते क्रिसमस ट्री और मोमबत्तियों की मधुर रोशनी विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। चर्चों में गूँजते भजन और केक काटने की खुशी हर दिल को छू लेती है। यह पर्व यहाँ की विविधता में भी एकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।




विश्व के कोने-कोने में क्रिसमस अपने अनोखे रंगों में रंगा हुआ दिखाई देता है, जो इसकी वैश्विक अपील को और गहरा करता है। यूरोपीय देशों में सदाबहार क्रिसमस ट्री जीवन के निरंतर चक्र और आशा का प्रतीक माना जाता है। पोलैंड में मकड़ी के जाल जैसी सजावट की कथा, जापान में क्रिसमस पर केएफसी का विशेष भोजन, ब्रिटेन में क्रिसमस क्रैकर्स फोड़ने की परंपरा, स्वीडन में डोनाल्ड डक कार्टून देखने का रिवाज और जर्मनी में एडवेंट कैलेंडर की प्रतीक्षा—ये सभी परंपराएँ क्रिसमस को सांस्कृतिक विविधता का जीवंत उत्सव बनाती हैं। इन भिन्न रीति-रिवाजों के बीच एक समान धागा है—प्रेम, क्षमा और सद्भाव का संदेश जो सीमाओं से परे हर हृदय तक पहुँचता है।





क्रिसमस (Christmas)का गहनतम सार करुणा और निष्काम सेवा में छिपा है। यह पर्व हमें आत्मचिंतन का अवसर देता है कि सच्चा सुख भौतिक वस्तुओं में नहीं, अपितु दूसरों की सहायता में निहित है। प्रभु यीशु ने सिखाया कि सबसे छोटे भाई-बहन की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। गरीबों, अनाथों, बीमारों और वंचितों की मदद करना इस उत्सव का मूल उद्देश्य है। यह दिन हमें अहंकार और स्वार्थ त्यागकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है। चाहे कोई किसी भी धर्म या संस्कृति से हो, क्रिसमस उसे मानवता के प्रति अपने कर्तव्य की याद दिलाता है। यही इस पर्व की सार्वभौमिकता है जो इसे विशेष बनाती है।

आधुनिक युग में जबकि पर्यावरण संकट गंभीर चुनौती बन चुका है, क्रिसमस को भी पर्यावरण-संवेदनशील दृष्टि से मनाने की आवश्यकता है। असली पेड़ काटने की बजाय कृत्रिम ट्री का बार-बार उपयोग अधिक पर्यावरण-अनुकूल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मत है कि दीर्घकालिक उपयोग में कृत्रिम पेड़ कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं। यह सोच हमें सिखाती है कि हमारे त्योहार केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति भी जिम्मेदार होने चाहिए। सच्ची उत्सव भावना तभी पूर्ण होती है जब हम प्रकृति और मानवता के बीच संतुलन बनाए रखें। इस दृष्टिकोण से क्रिसमस और भी प्रासंगिक हो जाता है।





क्रिसमस (Christmas)कोई साधारण उत्सव नहीं, अपितु प्रेम, करुणा और शांति का शाश्वत दिव्य संदेश है। यह हमें सिखाता है कि जब हम अपने हृदय से द्वेष, ईर्ष्या और स्वार्थ को निकालकर दूसरों के लिए जीते हैं, तभी जीवन का वास्तविक अर्थ प्रकट होता है। प्रभु यीशु का जीवन और उनके आदर्श हमें निरंतर प्रेरित करते हैं कि धर्म का सच्चा स्वरूप मानव-सेवा और निष्काम परोपकार में है। क्रिसमस का असली प्रकाश न तो चमचमाते दीपकों में है, न ही उपहारों की चमक में, बल्कि हमारे हृदयों में बसी दया, प्रेम और सहानुभूति की कोमल ज्योति में है। यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि हम मानवता की सेवा द्वारा ही एक समतामूलक, सहिष्णु और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण कर सकते हैं। क्रिसमस का अमर संदेश यही है—अपने अंतर्मन की ज्योति जगाओ और दूसरों के जीवन में आनंद का संचार करो। यही इस पावन उत्सव की सार्वभौमिक महत्ता है।

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